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Showing posts from December, 2017

समझो यार बनारस है !

जो तू बोले, जो मैं बोलूं, हर वो अल्फ़ाज़ बनारस है अपने हिन्द में सर्व सनातन, युग का आगाज़ बनारस है  छेड़ रहा जो मन ही मन में, दिल का राग बनारस है केंद्र बिंदु है ये विश्व का, शिव का ताज बनारस है महादेव की धरती है ये, रूद्र का आभाष बनारस है  ओढ़े जो बुद्ध पधारे शांति का, वो लिबास बनारस है  पंडित मोमिन सबकी प्याली में, समरसता का नाम बनारस है चढ़े न उतरे चढ़ता जाये,  ऐसा  जाम बनारस है  तलाश शांति की ख़त्म हो जहाँ, वो गंतव्य बनारस है  शिव की गंगा बहती जाये, वो वक्तव्य बनारस है  आरम्भ यदि है शंख की नाद,साँझ में अज़ान बनारस है  शिव नगरी में राम ही राम हैं, ऐसा धाम बनारस है  तीन लोकों में एक मिले ,तो समझो यार बनारस  है  जाति धर्म  से  ऊपर है ये ,प्रेम का घर बार बनारस  है  नमाज़ी की मंज़िल भी है, गंगा की  धार   बनारस  है वरुणा और अस्सी के बीच, संसार का सार बनारस  है   जले  चिता  तो  मुक्ति  समझो, मोक्ष  का  नाम...