Skip to main content

Posts

Showing posts from 2015

Nationalism

राष्ट्रधर्म   गांधी तुम चाहते तो लालकिले पर , भगवा फहरा सकते थे।   तुम चाहते तो तिब्बत पर भी, झंडा लहरा सकते थे।  तुम चाहते तो जिन्ना को , चरणो में झुकवा सकते थे।  तुम चाहते तो भारत का , बंटवारा रुकवा सकते थे।   तुम चाहते तो अंग्रेज़ो का, मष्तक झुकवा सकते थे।  तुम चाहते तो भगत सिंह की , फांसी रुकवा सकते थे।  सन सैतलिश में ही भारत माँ को , पटेल मिलना तय था।   लेकिन तुम तो  अहंकार के , घोर नशे में झूल गए थे।  गांधी नीति याद रही पर , भारत माँ को भूल गए थे। सावरकर से वीरों पर भी , अपना नियम जता डाला। गुरु गोविन्द सिंह और प्रताप को , भटका हुआ बता डाला।  भारत के बेटों पर अपने , नियम थोपकर चले गए।  बोस और पटेल की छाती पर , छुरा घोप कर चले गए।  तुमने पाक बनाया था वो , आज भी कफ़न तौलता है।   तुमको बापू कहने तक में, अपना खून खौलता है। सुन साबरमती के वासी , सोमनाथ में ग़ज़नी आया था।   जितना पानी नहीं बहा , उतना खून बहाया था।  सारी धरती लाल पड़ी थी , इतना हुआ अँधेरा था।  मैं च...

पाकिस्तान आतंकवाद की धरती

Pakistaan : Land Of Terrorism पाकिस्तान हालिया वर्षों में आतंकवाद के साये में पल रहा है और ये कहना भी गलत नही है की साथ ही साथ उसे बढ़ावा भी दे रहा है।  हाफिज सईद की जमात उद दावा का कहर पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में बरप रहा है।  पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भी इसमें पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। पाकिस्तान जिस आतंकवाद को शरण दे रहा है वो खुद उसके लिए ज़हर बन गया है। हाल में ही पाकिस्तान के पंजाब के गृह मंत्री पर हुआ आत्मघाती हमला और इसी वर्ष आर्मी स्कूल में करीब 500 बच्चों की मौत ने इसे  जगजाहिर कर दिया। भारत पाकिस्तान सीमा में घुसपैठ की खबर अब आम हो चुकी है और सॉसेफिरे का उलंघन अब एक नाटक बन चूका है। सीमा अब रंगमंच बन चुकी है जिसमे रंग केवल भारतीय सैनिकों का बहता है। ये बेहद दुखद है। इसकी कितनी भी निंदा की जाये वो काम है।  पाकिस्तान सब देखते हुए भी बाज नही आरहा है। जिस मजहब की बात पाकिस्तानी करते है उसी की पवित्र ईमारत के बाहर बम फोड़ते हैं। जी बात कर रहा हूँ शिया मस्जिदों की। अब आप ही देखिये कुछ दिन पहले गुरदासपुर के हमले के बाद पकड़ा गया ज़िंदा आतंकी मोहम्मद नावे...

The Downfall Of Gandhian Era

गांधीवाद का पतन  नेहरू गांधी परिवार का इतिहास वर्षो पुराना है।  एक वक़्त था जब कश्मीरी पंडित अपना वर्चस्व दिखाया करते थे। आज उनकी हालत सब जानते हैं।  नेहरू एक कश्मीरी पंडित थे और अपने जीवित रहते उन्होने कश्मीर को कितना समझा वो सब सब जानते हैं।  आखिरकार राजनीती में आना उनका एक मात्र विकल्प था।  उन दिनों कांग्रेस की तूती बोलती थी।  गांधी के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया और बन बैठे वो राजनीति के सुरमा। महात्मा गांधी इधर सक्रिय राजनीती से दूर बस अनशन  और आंदोलन का रास्ता अपना रहे थे।  केवल सत्य और अहिंसा का ,मार्ग उन्हें अछा लगता था।  सत्ता का तख्ता पलट अभी होना बाकि था जब देश के सांप्रदायिक मुद्दे रोज उठने लगे।  सवाल था देश के भविष्य का।  संविधान का अनुछेद 25 भारत को एक धर्म निरपेक्ष राज्य बनाता है।  साम्प्रदायिकता के मायाजाल में गांधीवाद  का पतन तब शुरू हुआ जब उन्हें नाथू राम गोडसे ने गोलियों से छलनी कर दिया। राजीव गांधी को LTTE(Liberation Tiger Of Tamil Ellam) नेता प्रभाकरन ने मार दिया जो एक अलग तमिल राज्य की मांग कर र...

नयी सरकार और मीडिया

पिछले साल बनी नयी सरकार एक उम्मीद की किरन लेकर आई थी। भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना हर एक भारतीय के आँखों में बिछ गया था। अब बात धरातल की करें तो ऐसा लगता है जैसे केवल योजनाओ का ऐलान हुआ है किन्तु सब पर अमल नहीं हुई है। मेरे कहने का तात्पर्य ये है की अभी देश के आंतरिक हालत पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न की विदेश नीतिओं पर। मीडिया मोदी जी की तारीफ़ किये थकती नहीं है। लेकिन बात यहाँ पर ये है की Make In India जैसे परियोजनाओं से देश की लघु उद्योग को कितना फायदा होगा। मैं खुद उनका प्रसंशक हूँ किन्तु सच कहना गलत नहीं है। ये सरकार गरीबों की सरकार थी। सरकार केवल धर्म एवं योजनाओ में ज्यादा गतिशील दिखाई दे रही है। हांलाकि इतने कम समय में सर कार के कार्य का विश्लेषण करना उचित नहीं है परन्तु बहुत ऐसे मुद्दे हैं जिससे गरीबों पर असामान्य रूप से बुरा असर पड़ता है। किसानो के लिए नयी परियोजनाए लानी चाहिए।  भूमि अधिग्रहण मामले को गरीबों की भूमि को नहीं लेना चाहिए। सरकार इस दिशा में पहल करे तो बेहतर है। जनता की उम्मीद सबसे पहले है यदि सरकार इनपर खरा उतरती है तभी वो एक सफल कार्यकाल का उदाहरण प्रस्तुत ...