गांधीवाद का पतन नेहरू गांधी परिवार का इतिहास वर्षो पुराना है। एक वक़्त था जब कश्मीरी पंडित अपना वर्चस्व दिखाया करते थे। आज उनकी हालत सब जानते हैं। नेहरू एक कश्मीरी पंडित थे और अपने जीवित रहते उन्होने कश्मीर को कितना समझा वो सब सब जानते हैं। आखिरकार राजनीती में आना उनका एक मात्र विकल्प था। उन दिनों कांग्रेस की तूती बोलती थी। गांधी के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया और बन बैठे वो राजनीति के सुरमा। महात्मा गांधी इधर सक्रिय राजनीती से दूर बस अनशन और आंदोलन का रास्ता अपना रहे थे। केवल सत्य और अहिंसा का ,मार्ग उन्हें अछा लगता था। सत्ता का तख्ता पलट अभी होना बाकि था जब देश के सांप्रदायिक मुद्दे रोज उठने लगे। सवाल था देश के भविष्य का। संविधान का अनुछेद 25 भारत को एक धर्म निरपेक्ष राज्य बनाता है। साम्प्रदायिकता के मायाजाल में गांधीवाद का पतन तब शुरू हुआ जब उन्हें नाथू राम गोडसे ने गोलियों से छलनी कर दिया। राजीव गांधी को LTTE(Liberation Tiger Of Tamil Ellam) नेता प्रभाकरन ने मार दिया जो एक अलग तमिल राज्य की मांग कर र...
A blog on the Indian Political Drama and National Issues.