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Showing posts from May, 2015

The Downfall Of Gandhian Era

गांधीवाद का पतन  नेहरू गांधी परिवार का इतिहास वर्षो पुराना है।  एक वक़्त था जब कश्मीरी पंडित अपना वर्चस्व दिखाया करते थे। आज उनकी हालत सब जानते हैं।  नेहरू एक कश्मीरी पंडित थे और अपने जीवित रहते उन्होने कश्मीर को कितना समझा वो सब सब जानते हैं।  आखिरकार राजनीती में आना उनका एक मात्र विकल्प था।  उन दिनों कांग्रेस की तूती बोलती थी।  गांधी के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया और बन बैठे वो राजनीति के सुरमा। महात्मा गांधी इधर सक्रिय राजनीती से दूर बस अनशन  और आंदोलन का रास्ता अपना रहे थे।  केवल सत्य और अहिंसा का ,मार्ग उन्हें अछा लगता था।  सत्ता का तख्ता पलट अभी होना बाकि था जब देश के सांप्रदायिक मुद्दे रोज उठने लगे।  सवाल था देश के भविष्य का।  संविधान का अनुछेद 25 भारत को एक धर्म निरपेक्ष राज्य बनाता है।  साम्प्रदायिकता के मायाजाल में गांधीवाद  का पतन तब शुरू हुआ जब उन्हें नाथू राम गोडसे ने गोलियों से छलनी कर दिया। राजीव गांधी को LTTE(Liberation Tiger Of Tamil Ellam) नेता प्रभाकरन ने मार दिया जो एक अलग तमिल राज्य की मांग कर र...

नयी सरकार और मीडिया

पिछले साल बनी नयी सरकार एक उम्मीद की किरन लेकर आई थी। भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना हर एक भारतीय के आँखों में बिछ गया था। अब बात धरातल की करें तो ऐसा लगता है जैसे केवल योजनाओ का ऐलान हुआ है किन्तु सब पर अमल नहीं हुई है। मेरे कहने का तात्पर्य ये है की अभी देश के आंतरिक हालत पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न की विदेश नीतिओं पर। मीडिया मोदी जी की तारीफ़ किये थकती नहीं है। लेकिन बात यहाँ पर ये है की Make In India जैसे परियोजनाओं से देश की लघु उद्योग को कितना फायदा होगा। मैं खुद उनका प्रसंशक हूँ किन्तु सच कहना गलत नहीं है। ये सरकार गरीबों की सरकार थी। सरकार केवल धर्म एवं योजनाओ में ज्यादा गतिशील दिखाई दे रही है। हांलाकि इतने कम समय में सर कार के कार्य का विश्लेषण करना उचित नहीं है परन्तु बहुत ऐसे मुद्दे हैं जिससे गरीबों पर असामान्य रूप से बुरा असर पड़ता है। किसानो के लिए नयी परियोजनाए लानी चाहिए।  भूमि अधिग्रहण मामले को गरीबों की भूमि को नहीं लेना चाहिए। सरकार इस दिशा में पहल करे तो बेहतर है। जनता की उम्मीद सबसे पहले है यदि सरकार इनपर खरा उतरती है तभी वो एक सफल कार्यकाल का उदाहरण प्रस्तुत ...