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समझो यार बनारस है !

जो तू बोले, जो मैं बोलूं, हर वो अल्फ़ाज़ बनारस है अपने हिन्द में सर्व सनातन, युग का आगाज़ बनारस है  छेड़ रहा जो मन ही मन में, दिल का राग बनारस है केंद्र बिंदु है ये विश्व का, शिव का ताज बनारस है महादेव की धरती है ये, रूद्र का आभाष बनारस है  ओढ़े जो बुद्ध पधारे शांति का, वो लिबास बनारस है  पंडित मोमिन सबकी प्याली में, समरसता का नाम बनारस है चढ़े न उतरे चढ़ता जाये,  ऐसा  जाम बनारस है  तलाश शांति की ख़त्म हो जहाँ, वो गंतव्य बनारस है  शिव की गंगा बहती जाये, वो वक्तव्य बनारस है  आरम्भ यदि है शंख की नाद,साँझ में अज़ान बनारस है  शिव नगरी में राम ही राम हैं, ऐसा धाम बनारस है  तीन लोकों में एक मिले ,तो समझो यार बनारस  है  जाति धर्म  से  ऊपर है ये ,प्रेम का घर बार बनारस  है  नमाज़ी की मंज़िल भी है, गंगा की  धार   बनारस  है वरुणा और अस्सी के बीच, संसार का सार बनारस  है   जले  चिता  तो  मुक्ति  समझो, मोक्ष  का  नाम...
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नक्सलवाद, जिम्मेदार कौन? - I

"थाकल बाप के आँख के आशा के नाम ह नक्सलबाड़ी..!"  जी हाँ यही गूंजा करता है आज भी.. भारत के अनेक राज्यों में.. सशस्त्र आंदोलन की एक नयी सोच.. जो आज ज़हर की तरह फैल चुकी है.. कानू सान्याल जी, जो कि नक्सलवाद के प्रणेता थे.. जब वे चारू मज़ूमदार के साथ मिलकर नक्सल आंदोलन को शुरू किया था.. इनका ध्येय था कि गरीब और किसानों को उनका हक मिले। दबे कुचले लोगों के अन्दर चिंगारी तो थी ही.. बस इस आंदोलन ने उसे हवा दे दी और शोले बन गए। आज दुनिया में कानु सान्याल और चारु मजुमदार तो नहीं है परन्तु उनका राजनीतिक और सैद्धांतिक प्रारुप का वो आंदोलन आज भटक गया है। उनका मानना था कि हथियार जनता के हाथ में हो, उसका इस्तेमाल हक के लिए किया जाए। उन्हे तो नक्सलवाद शब्द से ही आपत्ति थी। उन्हे अंतिम चरण में ऐसा लगने लगा कि शायद उनसे गलती हो गयी थी। उनके सिद्धांत को संशोधन मान कर नक्सलियों ने वामपंथी ताकतों को एकजुट किया। कई ऐसे भी नक्सली संगठन है जो की अब राजनीतीक पार्टी बन चुकी है और बाकायदा चुनाव में हाथ आजमाती है। यह नक्सल शब्द आया नक्सलबाड़ी से, जो कि पश्चिम बंगाल में एक गाँव है, वहाँ के रहने या इस ...

सत्ता का स्वाद

होली का माहौल पुरी तरह से तैयार हो चुका है, पुरा देश खास कर उत्तर प्रदेश चुनावी रंग में रंग चुका है। ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि 11 मार्च को किसकी गुलाल उड़ेगी और किसके चेहरे का रंग उडे़गा।  देखिए राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता। अभी कुछ दिन पहले BMC चुनाव में अलग अलग लड़ने वाली शिवसेना और भाजपा, अब एक दुसरे के साथ नजर आरही है। देखिए चुनावी समीकरण का सटीक आँकलन करना बेहद मुश्किल है। अभी देखिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव एक साथ आ गए हैं। रैलियों की बौछार सी हो गई थी पिछले दिनों में। अखिलेश भैया का काम बोल रहा है, उनके कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति बलात्कार केस में फरार हैं.. कांड बोल रहा है यूपी में। कानपुर और लखनऊ में छिपे आतंकी का पता भी इन्हें मध्यप्रदेश पुलिस बताती हैं.. कारनामा बोल रहा है। कुछ सपा वाले मित्र कह रहे हैं की हमने गुजरात को जलते देखा है, यूपी में नहीं होने देंगे, मैं कहता हूँ सर आपने गुजरात जलते देखा तो शायद गोधरा भी जलते देखा होगा, वो भी गुजरात में ही है। इसपर एकदम सन्नाटा पसर गया। भैया देखिये ये जो सेकुलरीज्म यानी धर्मनिरपेक्षता है वो केवल एक मुखौटा है...

मेरा परिचय मांगता मेरा देश

        मेरा परिचय मांगता मेरा देश एक बेहद अजीब किस्सा है जो आपलोगों से साझा कर रहा हूँ। हालांकि यह मेरी शैली नही है फिर भी एक प्रयास कर रहा हूँ। एक बार मेरी मुलाकात एक बेहद अजीम शख्सियत से हुई, मेरे बहुत करीबी हैं इसलिए ऐसे विशेषणों का इस्तेमाल करना पड़ता है 😀 तो चर्चा भारत की राजनीति पर हो रही थी और चुनावी माहौल बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर गरम था। तभी उन्होंने भाजपा और उनके घटक दलों के हार का विश्लेषण करना शुरू कर दिया। मैंने भी अपने विचार व्यक्त किए। वे हार के लिए पूर्णतः बिहार की जनता को दोषी ठहराते हुए कहा कि बिहार का इतिहास और यहाँ के लोग दोनों ही कर्महीन हैं। यह बात मुझे चुभ सी गई और मैंने मुस्कुरा कर उनसे कुछ सवाल पूछने की अनुमति माँगी। उन्होंने हामी भरते हुए अपनी अनुमति जाहिर की। मैंने पुछा : 1. भारत की सर्वप्रथम राजधानी कौन सी थी? 2. वाल्मीकि द्वारा रामायण कहाँ रची गई थी? 3. चक्रवर्ती सम्राट अशोक और गुरु गोविंद सिंह जी की कर्मभूमि कौन सी है? 4. आचार्य चाणक्य और महान गणितज्ञ आर्यभट्ट जिन्होंने शुन्य दिया उनका जन्म कहाँ हुआ था? 5. भारत में सबसे प...

Nationalism 2

नोट: मैं गांधी जी का सम्मान करता हूँ परन्तु उनकी विचारधारा का नहीं, कुछ बुरा लगे तो एक बार राष्ट्रवाद से जोङ कर देखिएगा। ... *******...                           कश्मीर , कन्हैया, क्रांति...

Nationalism

राष्ट्रधर्म   गांधी तुम चाहते तो लालकिले पर , भगवा फहरा सकते थे।   तुम चाहते तो तिब्बत पर भी, झंडा लहरा सकते थे।  तुम चाहते तो जिन्ना को , चरणो में झुकवा सकते थे।  तुम चाहते तो भारत का , बंटवारा रुकवा सकते थे।   तुम चाहते तो अंग्रेज़ो का, मष्तक झुकवा सकते थे।  तुम चाहते तो भगत सिंह की , फांसी रुकवा सकते थे।  सन सैतलिश में ही भारत माँ को , पटेल मिलना तय था।   लेकिन तुम तो  अहंकार के , घोर नशे में झूल गए थे।  गांधी नीति याद रही पर , भारत माँ को भूल गए थे। सावरकर से वीरों पर भी , अपना नियम जता डाला। गुरु गोविन्द सिंह और प्रताप को , भटका हुआ बता डाला।  भारत के बेटों पर अपने , नियम थोपकर चले गए।  बोस और पटेल की छाती पर , छुरा घोप कर चले गए।  तुमने पाक बनाया था वो , आज भी कफ़न तौलता है।   तुमको बापू कहने तक में, अपना खून खौलता है। सुन साबरमती के वासी , सोमनाथ में ग़ज़नी आया था।   जितना पानी नहीं बहा , उतना खून बहाया था।  सारी धरती लाल पड़ी थी , इतना हुआ अँधेरा था।  मैं च...

पाकिस्तान आतंकवाद की धरती

Pakistaan : Land Of Terrorism पाकिस्तान हालिया वर्षों में आतंकवाद के साये में पल रहा है और ये कहना भी गलत नही है की साथ ही साथ उसे बढ़ावा भी दे रहा है।  हाफिज सईद की जमात उद दावा का कहर पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में बरप रहा है।  पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भी इसमें पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। पाकिस्तान जिस आतंकवाद को शरण दे रहा है वो खुद उसके लिए ज़हर बन गया है। हाल में ही पाकिस्तान के पंजाब के गृह मंत्री पर हुआ आत्मघाती हमला और इसी वर्ष आर्मी स्कूल में करीब 500 बच्चों की मौत ने इसे  जगजाहिर कर दिया। भारत पाकिस्तान सीमा में घुसपैठ की खबर अब आम हो चुकी है और सॉसेफिरे का उलंघन अब एक नाटक बन चूका है। सीमा अब रंगमंच बन चुकी है जिसमे रंग केवल भारतीय सैनिकों का बहता है। ये बेहद दुखद है। इसकी कितनी भी निंदा की जाये वो काम है।  पाकिस्तान सब देखते हुए भी बाज नही आरहा है। जिस मजहब की बात पाकिस्तानी करते है उसी की पवित्र ईमारत के बाहर बम फोड़ते हैं। जी बात कर रहा हूँ शिया मस्जिदों की। अब आप ही देखिये कुछ दिन पहले गुरदासपुर के हमले के बाद पकड़ा गया ज़िंदा आतंकी मोहम्मद नावे...