जो तू बोले, जो मैं बोलूं, हर वो अल्फ़ाज़ बनारस हैअपने हिन्द में सर्व सनातन, युग का आगाज़ बनारस हैछेड़ रहा जो मन ही मन में, दिल का राग बनारस हैकेंद्र बिंदु है ये विश्व का, शिव का ताज बनारस है
महादेव की धरती है ये, रूद्र का आभाष बनारस हैओढ़े जो बुद्ध पधारे शांति का, वो लिबास बनारस हैपंडित मोमिन सबकी प्याली में, समरसता का नाम बनारस हैचढ़े न उतरे चढ़ता जाये, ऐसा जाम बनारस है
तलाश शांति की ख़त्म हो जहाँ, वो गंतव्य बनारस हैशिव की गंगा बहती जाये, वो वक्तव्य बनारस हैआरम्भ यदि है शंख की नाद,साँझ में अज़ान बनारस हैशिव नगरी में राम ही राम हैं, ऐसा धाम बनारस है
तीन लोकों में एक मिले ,तो समझो यार बनारस है
जाति धर्म से ऊपर है ये ,प्रेम का घर बार बनारस है
नमाज़ी की मंज़िल भी है, गंगा की धार बनारस है
वरुणा और अस्सी के बीच, संसार का सार बनारस है
जले चिता तो मुक्ति समझो, मोक्ष का नाम बनारस है
तेरा मेरा साथ न छूटे, उस सोच का नाम बनारस है
नहीं है "संगम" मेल है फिर भी, काशी का नाम बनारस है
गंगा जमुनी तहजीब सीखा दे, उस द्वार का नाम बनारस है

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