गांधीवाद का पतन
नेहरू गांधी परिवार का इतिहास वर्षो पुराना है। एक वक़्त था जब कश्मीरी पंडित अपना वर्चस्व दिखाया करते थे। आज उनकी हालत सब जानते हैं। नेहरू एक कश्मीरी पंडित थे और अपने जीवित रहते उन्होने कश्मीर को कितना समझा वो सब सब जानते हैं। आखिरकार राजनीती में आना उनका एक मात्र विकल्प था। उन दिनों कांग्रेस की तूती बोलती थी। गांधी के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया और बन बैठे वो राजनीति के सुरमा। महात्मा गांधी इधर सक्रिय राजनीती से दूर बस अनशन और आंदोलन का रास्ता अपना रहे थे। केवल सत्य और अहिंसा का ,मार्ग उन्हें अछा लगता था। सत्ता का तख्ता पलट अभी होना बाकि था जब देश के सांप्रदायिक मुद्दे रोज उठने लगे। सवाल था देश के भविष्य का। संविधान का अनुछेद 25 भारत को एक धर्म निरपेक्ष राज्य बनाता है। साम्प्रदायिकता के मायाजाल में गांधीवाद का पतन तब शुरू हुआ जब उन्हें नाथू राम गोडसे ने गोलियों से छलनी कर दिया। राजीव गांधी को LTTE(Liberation Tiger Of Tamil Ellam) नेता प्रभाकरन ने मार दिया जो एक अलग तमिल राज्य की मांग कर रहे थे। संजय गांधी की मृत्यु एक विमान दुर्घटना में ही थी। अतः अब देश में राजनीतिक संकट गहराने लगा। एक उभरती हुई नयी नेता सामने आई श्रीमती इंदिरा प्रियदर्शिनी। परन्तु सिख समुदाय के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन Blue Star चलने और उसे छतिग्रस्त करना उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई और उनके ही अंगरक्षकों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया। अब कांग्रेस सरकार बनाने से ज्यादा प्रधानमंत्री पद की चिंता में थी की उनके 2 प्रधानमंत्रियों को उनके कार्यकाल में ही मार दिया गया था तो अब क्या किया जाये ? अब धुर्वीकरण की राजनीती शुरू हो गयी। कभी इंद्र कुमार गुजराल तो कभी डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। तमिलों को लुभाने के लिए कोचेरील रमन नारायणन को देश का राष्ट्रपति बना दिया। सोनिया गांधी की चमक देश में बढ़ने लगी। अमेठी से लगातार चुनाव जीती और UPA(United Progressive Alliance) का गठन हुआ। परन्तु ज्यादा दिनों तक ये सिलसिला नहीं चला और लगातार भ्रष्टाचार और कुशाशन के आरोप झेलती आ रही कांग्रेस अंततः 2015 के आम चुनाव में बुरी तरह से परास्त हुई। नेतृत्व के कमी के वजह से कांग्रेस का उठ के खड़ा हो पाना मुश्किल हो गया। राहुल गांधी का ज़िक्र नही है क्यूंकि देश में राहुल गांधी , अरविन्द केजरीवाल और असादुद्दीन ओवैसी को गंभीरता से लेना कानूनन जुर्म है। जय भारत।
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