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नयी सरकार और मीडिया

पिछले साल बनी नयी सरकार एक उम्मीद की किरन लेकर आई थी। भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना हर एक भारतीय के आँखों में बिछ गया था। अब बात धरातल की करें तो ऐसा लगता है जैसे केवल योजनाओ का ऐलान हुआ है किन्तु सब पर अमल नहीं हुई है। मेरे कहने का तात्पर्य ये है की अभी देश के आंतरिक हालत पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न की विदेश नीतिओं पर। मीडिया मोदी जी की तारीफ़ किये थकती नहीं है। लेकिन बात यहाँ पर ये है की Make In India जैसे परियोजनाओं से देश की लघु उद्योग को कितना फायदा होगा। मैं खुद उनका प्रसंशक हूँ किन्तु सच कहना गलत नहीं है। ये सरकार गरीबों की सरकार थी। सरकार केवल धर्म एवं योजनाओ में ज्यादा गतिशील दिखाई दे रही है। हांलाकि इतने कम समय में सरकार के कार्य का विश्लेषण करना उचित नहीं है परन्तु बहुत ऐसे मुद्दे हैं जिससे गरीबों पर असामान्य रूप से बुरा असर पड़ता है। किसानो के लिए नयी परियोजनाए लानी चाहिए।  भूमि अधिग्रहण मामले को गरीबों की भूमि को नहीं लेना चाहिए। सरकार इस दिशा में पहल करे तो बेहतर है। जनता की उम्मीद सबसे पहले है यदि सरकार इनपर खरा उतरती है तभी वो एक सफल कार्यकाल का उदाहरण प्रस्तुत करेगी।
लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ मीडिया ने कभी इस ओर प्रकाश नहीं डाला है।  एक आम आदमी की आवाज़ यदि सरकार तक पहुचती है तब ही वो जान पायेगे की सरकार से उनकी क्या उम्मीदे है और मीडिया का यही काम है। किन्तु मीडिया बेतुकी खबरे प्रकाशित करती है दिखाती है। ऐसा लगता है जैसे ये बिकी हुई है , या अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है। सच दिखाने से डरती है ये मीडिया।  इन्हे इस बारे में सोचना चाहिए और जो भी मुद्दे देश के हित में है उसे बुलंद आवाज़ के साथ उठाना चाहिए jo की सरकार के लिए Wake Up Call का काम करेगी।  जय भारत।


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