Skip to main content

पाकिस्तान आतंकवाद की धरती

Pakistaan : Land Of Terrorism
पाकिस्तान हालिया वर्षों में आतंकवाद के साये में पल रहा है और ये कहना भी गलत नही है की साथ ही साथ उसे बढ़ावा भी दे रहा है।  हाफिज सईद की जमात उद दावा का कहर पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में बरप रहा है।  पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भी इसमें पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। पाकिस्तान जिस आतंकवाद को शरण दे रहा है वो खुद उसके लिए ज़हर बन गया है। हाल में ही पाकिस्तान के पंजाब के गृह मंत्री पर हुआ आत्मघाती हमला और इसी वर्ष आर्मी स्कूल में करीब 500 बच्चों की मौत ने इसे  जगजाहिर कर दिया। भारत पाकिस्तान सीमा में घुसपैठ की खबर अब आम हो चुकी है और सॉसेफिरे का उलंघन अब एक नाटक बन चूका है। सीमा अब रंगमंच बन चुकी है जिसमे रंग केवल भारतीय सैनिकों का बहता है। ये बेहद दुखद है। इसकी कितनी भी निंदा की जाये वो काम है।  पाकिस्तान सब देखते हुए भी बाज नही आरहा है। जिस मजहब की बात पाकिस्तानी करते है उसी की पवित्र ईमारत के बाहर बम फोड़ते हैं। जी बात कर रहा हूँ शिया मस्जिदों की। अब आप ही देखिये कुछ दिन पहले गुरदासपुर के हमले के बाद पकड़ा गया ज़िंदा आतंकी मोहम्मद नावेद खुद को पाकिस्तानी बताता है। पाकिस्तान हर बार पूरी तरह से बेनक़ाब हुआ है परन्तु सच से नफरत करने वाले जैसे नए नए बहाने बनाते है उसी तरह का रवैया पाकिस्तान अपनाता आरहा है। दावूद इब्राहिम भी पाकिस्तान के शरण में है। उफ़ा सम्मलेन में दोनों देशों के बीच NSA स्तर की बातचीत होने के मुद्दे पर मुहर लगी थी परन्तु  पाकिस्तान लगातार कश्मीर घाटी के अलगाववादी नेताओं से संपर्क साधने पर लगा था  जिसके वजह से ये भी संभव नही हो पाया। अब वक़्त आगया है की भारत को  शांति वार्ता छोड़ कर सीधा कार्रवाई करनी चाहिए क्यूंकि देश का अमन चैन बिगड़ गया है और कश्मीर की धरती चिल्ला कर बस इतना कह रही है। 

 "कोई कहानी हु न कोई किस्सा हूँ मैं... मेरे भारत तेरा एक हिस्सा हूँ मैं।" 

Comments

Popular posts from this blog

समझो यार बनारस है !

जो तू बोले, जो मैं बोलूं, हर वो अल्फ़ाज़ बनारस है अपने हिन्द में सर्व सनातन, युग का आगाज़ बनारस है  छेड़ रहा जो मन ही मन में, दिल का राग बनारस है केंद्र बिंदु है ये विश्व का, शिव का ताज बनारस है महादेव की धरती है ये, रूद्र का आभाष बनारस है  ओढ़े जो बुद्ध पधारे शांति का, वो लिबास बनारस है  पंडित मोमिन सबकी प्याली में, समरसता का नाम बनारस है चढ़े न उतरे चढ़ता जाये,  ऐसा  जाम बनारस है  तलाश शांति की ख़त्म हो जहाँ, वो गंतव्य बनारस है  शिव की गंगा बहती जाये, वो वक्तव्य बनारस है  आरम्भ यदि है शंख की नाद,साँझ में अज़ान बनारस है  शिव नगरी में राम ही राम हैं, ऐसा धाम बनारस है  तीन लोकों में एक मिले ,तो समझो यार बनारस  है  जाति धर्म  से  ऊपर है ये ,प्रेम का घर बार बनारस  है  नमाज़ी की मंज़िल भी है, गंगा की  धार   बनारस  है वरुणा और अस्सी के बीच, संसार का सार बनारस  है   जले  चिता  तो  मुक्ति  समझो, मोक्ष  का  नाम...

Nationalism

राष्ट्रधर्म   गांधी तुम चाहते तो लालकिले पर , भगवा फहरा सकते थे।   तुम चाहते तो तिब्बत पर भी, झंडा लहरा सकते थे।  तुम चाहते तो जिन्ना को , चरणो में झुकवा सकते थे।  तुम चाहते तो भारत का , बंटवारा रुकवा सकते थे।   तुम चाहते तो अंग्रेज़ो का, मष्तक झुकवा सकते थे।  तुम चाहते तो भगत सिंह की , फांसी रुकवा सकते थे।  सन सैतलिश में ही भारत माँ को , पटेल मिलना तय था।   लेकिन तुम तो  अहंकार के , घोर नशे में झूल गए थे।  गांधी नीति याद रही पर , भारत माँ को भूल गए थे। सावरकर से वीरों पर भी , अपना नियम जता डाला। गुरु गोविन्द सिंह और प्रताप को , भटका हुआ बता डाला।  भारत के बेटों पर अपने , नियम थोपकर चले गए।  बोस और पटेल की छाती पर , छुरा घोप कर चले गए।  तुमने पाक बनाया था वो , आज भी कफ़न तौलता है।   तुमको बापू कहने तक में, अपना खून खौलता है। सुन साबरमती के वासी , सोमनाथ में ग़ज़नी आया था।   जितना पानी नहीं बहा , उतना खून बहाया था।  सारी धरती लाल पड़ी थी , इतना हुआ अँधेरा था।  मैं च...

The Downfall Of Gandhian Era

गांधीवाद का पतन  नेहरू गांधी परिवार का इतिहास वर्षो पुराना है।  एक वक़्त था जब कश्मीरी पंडित अपना वर्चस्व दिखाया करते थे। आज उनकी हालत सब जानते हैं।  नेहरू एक कश्मीरी पंडित थे और अपने जीवित रहते उन्होने कश्मीर को कितना समझा वो सब सब जानते हैं।  आखिरकार राजनीती में आना उनका एक मात्र विकल्प था।  उन दिनों कांग्रेस की तूती बोलती थी।  गांधी के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया और बन बैठे वो राजनीति के सुरमा। महात्मा गांधी इधर सक्रिय राजनीती से दूर बस अनशन  और आंदोलन का रास्ता अपना रहे थे।  केवल सत्य और अहिंसा का ,मार्ग उन्हें अछा लगता था।  सत्ता का तख्ता पलट अभी होना बाकि था जब देश के सांप्रदायिक मुद्दे रोज उठने लगे।  सवाल था देश के भविष्य का।  संविधान का अनुछेद 25 भारत को एक धर्म निरपेक्ष राज्य बनाता है।  साम्प्रदायिकता के मायाजाल में गांधीवाद  का पतन तब शुरू हुआ जब उन्हें नाथू राम गोडसे ने गोलियों से छलनी कर दिया। राजीव गांधी को LTTE(Liberation Tiger Of Tamil Ellam) नेता प्रभाकरन ने मार दिया जो एक अलग तमिल राज्य की मांग कर र...