Skip to main content

सत्ता का स्वाद

होली का माहौल पुरी तरह से तैयार हो चुका है, पुरा देश खास कर उत्तर प्रदेश चुनावी रंग में रंग चुका है। ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि 11 मार्च को किसकी गुलाल उड़ेगी और किसके चेहरे का रंग उडे़गा।  देखिए राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता। अभी कुछ दिन पहले BMC चुनाव में अलग अलग लड़ने वाली शिवसेना और भाजपा, अब एक दुसरे के साथ नजर आरही है। देखिए चुनावी समीकरण का सटीक आँकलन करना बेहद मुश्किल है। अभी देखिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव एक साथ आ गए हैं। रैलियों की बौछार सी हो गई थी पिछले दिनों में। अखिलेश भैया का काम बोल रहा है, उनके कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति बलात्कार केस में फरार हैं.. कांड बोल रहा है यूपी में। कानपुर और लखनऊ में छिपे आतंकी का पता भी इन्हें मध्यप्रदेश पुलिस बताती हैं.. कारनामा बोल रहा है। कुछ सपा वाले मित्र कह रहे हैं की हमने गुजरात को जलते देखा है, यूपी में नहीं होने देंगे, मैं कहता हूँ सर आपने गुजरात जलते देखा तो शायद गोधरा भी जलते देखा होगा, वो भी गुजरात में ही है। इसपर एकदम सन्नाटा पसर गया। भैया देखिये ये जो सेकुलरीज्म यानी धर्मनिरपेक्षता है वो केवल एक मुखौटा है जो नेता लगा कर घुमते हैं। खैर यूपी का परिणाम तो भाजपा की साख का सवाल है। कुछ लोग कह रहे थे कि दो युवाओं ने प्रधानमंत्री को रोड शो करने पर मजबूर कर दिया। जनाब, महाभारत के युद्ध के मैदान में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण को भी आना पड़ा था, ये तो एक विधानसभा चुनाव है, और जहाँ जहाँ मोदी जी नहीं जा सके वहाँ भाजपा के स्टार प्रचारक श्री राहुल गांधी ने रैली किया। काशी को पुरे चुनाव का केंद्र बना दिया गया, आखिर क्यूँ न बने,यह तो आखिर पुरे ब्रह्माण्ड का केंद्र है। अखिलेश जी कहते हुए दिखे की परीक्षा में चोरी सब करते हैं, सही कहा है भाई, जब बुद्धि अखिलेश हो जाती है तब जिंदगी उत्तर प्रदेश हो जाती है। 
अब चलिए केजरीवाल की बात कर लेते हैं। दिल्ली में मुहल्ला क्लीनिक खुलवाने और शिक्षा के बजट बढाने के लिए शुभकामना। किन्तु सुबह से शाम तक मोदी का नाम जपने वाला यह जन्तु खुद का इलाज़ करवाने बंगलुरु क्यू जाता है? आप के आधे विधायक तो जेल में हैं। जनाब के ऊपर हर प्रकार के पदार्थ फेंके जा चुके हैं जैसे - जुता, स्याही और दिल्ली की जहरीली हवा। 
राजनीति आजकल बिना कन्हैया कुमार के अधुरी है, ये जनाब बेहद गरीब हैं। ये देश के आखिरी गरीब हैं। इनके अलावा सभी अमीर है, मैं भी। यह गरीब हवाई जहाज में किसी भी आदमी से लड़ लेता है और iPhone से ट्विट करता है और कहता है कि मोदी ने हमला करवाया है। इसे आजादी चाहिए, इसे फिलहाल कोर्ट ने देशद्रोह के आरोपों से आजाद किया है। कन्हैया कुमार एक बिमारी है। जो जेएनयु और कुछ विश्वविद्यालयों में फैला हुआ है। ये भुखमरी और गरीबी से आजादी मांगता है। बीच बीच में कश्मीर की भी। ये कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थक एक बार बंगाल होकर आए और देखे जहाँ वामपंथी दलों ने राज किया वो राज्य आज गरीबी से जुझ रहा है। नक्सलियों ने घेर रखा है बंगाल को। अपना राज्य संभलता नहीं और चले देश को आजाद कराने। 
"कोई सपना न देखो की ये जमीन बांट ली जाएगी, जो देश बांटना मांगेगी वो जीभ काट ली जाएगी"। और हाँ, आजादी तो मिलेगी कश्मीर को लेकीन वो पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान से मिलेगी। इसका कहना है कि परेशान और गरीब लोग आतंकी बनते हैं, भैया मैं भी परेशान हूँ, Pointers कम है, तो क्या आतंकी बन जाऊँ? 
"बर्बाद गुलीस्तान करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है, हर डाल पर उल्लू बैठा है अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा" 

गुरमेहर कौर का ट्विटर पर ट्विट आपने देखा होगा। एक शहीद की बेटी, जिसको लगता है कि उनके पिता को पाकिस्तान ने नहीं बल्कि युद्ध ने मारा है। ये उसका नजरिया है परन्तु कुछ असामाजिक तत्वों ने उसे बलात्कार की धमकी दी है, जो कि गलत है। उसका विरोध किया जा सकता है परन्तु ऐसे अमानवीय व्यवहार करके नहीं। समाज को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। अच्छे नागरिक की पहचान वही है। 
होली की शुभकामनाएं। जीवन और मिजाज दोनों रंगीन रहे। जय हिंद। 




Comments

  1. जब बुद्धि अखिलेश हो जाती है तब जिंदगी उत्तर प्रदेश हो जाती है। bilkul sahi kaha bhai...bahut acha likhte ho... ye post akhbar aur sab jagah pahuchna chahiye./..bahut sahi vichar hai.. aese hi likhte raho...

    ReplyDelete
  2. "बर्बाद गुलीस्तान करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है, हर डाल पर उल्लू बैठा है अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा"

    बेहद सही कहा आपने बिनायक । अंजाम ऐ गुलिस्ता 13 तारीख को पता चलेगा।

    ReplyDelete

Post a Comment

We welcome your valuable comments.

Popular posts from this blog

समझो यार बनारस है !

जो तू बोले, जो मैं बोलूं, हर वो अल्फ़ाज़ बनारस है अपने हिन्द में सर्व सनातन, युग का आगाज़ बनारस है  छेड़ रहा जो मन ही मन में, दिल का राग बनारस है केंद्र बिंदु है ये विश्व का, शिव का ताज बनारस है महादेव की धरती है ये, रूद्र का आभाष बनारस है  ओढ़े जो बुद्ध पधारे शांति का, वो लिबास बनारस है  पंडित मोमिन सबकी प्याली में, समरसता का नाम बनारस है चढ़े न उतरे चढ़ता जाये,  ऐसा  जाम बनारस है  तलाश शांति की ख़त्म हो जहाँ, वो गंतव्य बनारस है  शिव की गंगा बहती जाये, वो वक्तव्य बनारस है  आरम्भ यदि है शंख की नाद,साँझ में अज़ान बनारस है  शिव नगरी में राम ही राम हैं, ऐसा धाम बनारस है  तीन लोकों में एक मिले ,तो समझो यार बनारस  है  जाति धर्म  से  ऊपर है ये ,प्रेम का घर बार बनारस  है  नमाज़ी की मंज़िल भी है, गंगा की  धार   बनारस  है वरुणा और अस्सी के बीच, संसार का सार बनारस  है   जले  चिता  तो  मुक्ति  समझो, मोक्ष  का  नाम...

Nationalism

राष्ट्रधर्म   गांधी तुम चाहते तो लालकिले पर , भगवा फहरा सकते थे।   तुम चाहते तो तिब्बत पर भी, झंडा लहरा सकते थे।  तुम चाहते तो जिन्ना को , चरणो में झुकवा सकते थे।  तुम चाहते तो भारत का , बंटवारा रुकवा सकते थे।   तुम चाहते तो अंग्रेज़ो का, मष्तक झुकवा सकते थे।  तुम चाहते तो भगत सिंह की , फांसी रुकवा सकते थे।  सन सैतलिश में ही भारत माँ को , पटेल मिलना तय था।   लेकिन तुम तो  अहंकार के , घोर नशे में झूल गए थे।  गांधी नीति याद रही पर , भारत माँ को भूल गए थे। सावरकर से वीरों पर भी , अपना नियम जता डाला। गुरु गोविन्द सिंह और प्रताप को , भटका हुआ बता डाला।  भारत के बेटों पर अपने , नियम थोपकर चले गए।  बोस और पटेल की छाती पर , छुरा घोप कर चले गए।  तुमने पाक बनाया था वो , आज भी कफ़न तौलता है।   तुमको बापू कहने तक में, अपना खून खौलता है। सुन साबरमती के वासी , सोमनाथ में ग़ज़नी आया था।   जितना पानी नहीं बहा , उतना खून बहाया था।  सारी धरती लाल पड़ी थी , इतना हुआ अँधेरा था।  मैं च...

The Downfall Of Gandhian Era

गांधीवाद का पतन  नेहरू गांधी परिवार का इतिहास वर्षो पुराना है।  एक वक़्त था जब कश्मीरी पंडित अपना वर्चस्व दिखाया करते थे। आज उनकी हालत सब जानते हैं।  नेहरू एक कश्मीरी पंडित थे और अपने जीवित रहते उन्होने कश्मीर को कितना समझा वो सब सब जानते हैं।  आखिरकार राजनीती में आना उनका एक मात्र विकल्प था।  उन दिनों कांग्रेस की तूती बोलती थी।  गांधी के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया और बन बैठे वो राजनीति के सुरमा। महात्मा गांधी इधर सक्रिय राजनीती से दूर बस अनशन  और आंदोलन का रास्ता अपना रहे थे।  केवल सत्य और अहिंसा का ,मार्ग उन्हें अछा लगता था।  सत्ता का तख्ता पलट अभी होना बाकि था जब देश के सांप्रदायिक मुद्दे रोज उठने लगे।  सवाल था देश के भविष्य का।  संविधान का अनुछेद 25 भारत को एक धर्म निरपेक्ष राज्य बनाता है।  साम्प्रदायिकता के मायाजाल में गांधीवाद  का पतन तब शुरू हुआ जब उन्हें नाथू राम गोडसे ने गोलियों से छलनी कर दिया। राजीव गांधी को LTTE(Liberation Tiger Of Tamil Ellam) नेता प्रभाकरन ने मार दिया जो एक अलग तमिल राज्य की मांग कर र...