नोट: मैं गांधी जी का सम्मान करता हूँ परन्तु उनकी विचारधारा का नहीं, कुछ बुरा लगे तो एक बार राष्ट्रवाद से जोङ कर देखिएगा।
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कश्मीर, कन्हैया, क्रांति
पिछले कुछ महीनों से काश्मीर में हो रही हिंसा यह बता रही है कि हम एक बार फिर वही गांधी और जिन्ना वाली राजनीतिक साजिश की ओर बढ़ रहे हैं। मेरे शब्द थोड़े कड़वे है परन्तु जिस तरह से अलगाववादी नेताओं ने जमघट लगा कर आए दिन राष्ट्रविरोधी नारे और काम कर रहे हैं इससे यही प्रतित होता है कि भारत के टुकड़े फिर से होंगे। दुख की बात यह है कि एक तरफ बलूचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पुरी तरह से आए दिन पाकिस्तान का विरोध कर रहा है तो दूसरी तरफ अपने लोग ही हमारे देश में नफरत की राजनीति कर रहे हैं। अपना देश संभल नहीं रहा और हमारे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है पाकिस्तान।
मुझे बुरहान वानी और याकूब मेमन की मौत से कोई मतलब नहीं है परन्तु चिंता उनके जनाजे के भीड़ को देखकर होता है की कश्मीर के युवा आखिर ऐसे लोगों का समर्थन क्यूँ कर रहे हैं? अंग्रेजी में देश को Motherland कहने में आपत्ति नहीं है तो फिर हिंदी में भारत माता कहने में क्या तकलीफ?? ये बातें केवल हिंसा फैलाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। हम कब जागेंगे? कबतक खुलेआम "जीवे जीवे पाकिस्तान" के नारे लगाते रहेंगे ये भटके हुए लोग?? गरीबी, बेरोजगारी से आजादी के लिए चिल्लाने वाला कन्हैया कुमार खुद को गरीब का बेटा कहता है और फिर iPhone से अपनी Selfie के साथ Tweet करता है की Flight में किसी ने उसपर जानलेवा हमला किया है!! इस गरीब के पास पैसे आते कहाँ से है?? हवाईजहाज और मोबाइल के! ये सब केवल राजनीतिक सिक्का चमकाने का नया तरीका है। वैसे लिखने को तो काफी बातें हैं परन्तु अब यही खत्म करता हूँ। तीसरा भाग जल्द ही।
भारत माता की जय। जय हिंद।
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